Saturday, February 25, 2012
Thursday, February 9, 2012
अधूरापन
अधूरापन
आज सुबह की बात है...
जब सूरज तो नहीं था, सवेरा था..
पर चाँद ठहरा हुआ था |
क्या पता क्या ढूंढ रहा था..
बस एक टक देख रहा था...
सोच रहा था पता नहीं क्या...
पर मालूम था उसे ..
की आज वो ढलेगा नहीं ..||
आसमान गवाह था आज के इस हालात का...
चाँद की सूरज से फिर एक मुलाक़ात का..|
आवाजे तो गूँज रही थी, सिर्फ खामोशियो की
फिर भी चाँद के दिल में..
शोर सा क्यूँ था??
बुत की तरह खड़ा..इंतजार कर रहा था..
तभी ध्यान भटका उसका..
चिड़ियाओ के चहकने से,
चाँद की दबी हसी ने बयां किया
की वो अकेला नहीं था जिसे सूरज का इंतज़ार था...
हवा की चादर ओढ़े,
अब आसमान भी अलकसाया..
की कब तक चाँद यूँही ठहरा रहेगा! ||
बादल अब हटने से लगे..
और चाँद चौकन्ना हुआ..!
फिर जिस नज़ारे का इंतज़ार था...
वो वक़्त आया |
पहली धीमी किरण, पहाड़ो से होके गुजरी...
और फिर एक अचानक हुई आहत से
पंछी उड़ खड़े हुए,
उस रोशनी में..धीमी सुबह में..जैसे बह गए हो..|
अब चाँद का जाने का इरादा था
बस कह चली उसकी खामोशियाँ ...
"तेरी नज़र में, मैं कभी पूरा हूँ, कभी अधूरा हूँ, और कभी हूँ ही नहीं..
पर मैं हूँ, तुझे दूर से देखता, और ढल जाता" ||
पर मैं हूँ, तुझे दूर से देखता, और ढल जाता" ||
-अक्षरा वर्मा
Subscribe to:
Posts (Atom)